आईएएस अपूर्वा दुबे जीवनी/जीवन परिचय [IAS Apurna Dubey Biography In Hindi]

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हर माता – पिता का सपना होता है कि उनकी संतान आगे चलकर कुछ अच्छा करें और जब बात हो सिविल सर्विस की तो अगर संतान का चयन सिविल सर्विस में हो जाए तो माता – पिता का सर गर्व से ऊंचा हो जाता है । केवल माता – पिता का सिर ही नहीं पढ़ाने वाले शिक्षकगण, ग्रामवासी तथा जिलावासी सभी को गर्व महसूस होता है । देवरिया की बेटी अपूर्वा ने कड़ी मेहनत करके यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास कर ली और आईएएस (IAS) में चयन हो गया । आईएएस के डीएम पद पर वो वर्तमान में कार्यरत हैं । वो 2012 बैच में यूपीएससी (UPSC) पर ऑल इंडिया रैंक 19 हासिल की ।

नामअपूर्वा दुबे
उपनामज्ञात नहीं
जन्म तिथि23 सितंबर 1988
उम्र32 (7 जनवरी 2021 के अनुसार)
पितासंजय दुबे
माताज्ञात नहीं
दीदीअदिति
जन्म स्थललखनउ, भारत
स्कूलविवेकानंद केंद्रीय विद्यालय, इटानगर, अरूणांचल प्रदेश
कॉलेजवेंकटेश्वर कॉलेज (DU)
यूपीएससी रैंक (UPSC Rank)19
आईएएस बैच (IAS Batch)2012
राष्ट्रीयताभारतीय

प्रारंभिक जीवन

अपूर्वा का जन्म 23 सितंबर 1988 को लखनउ भारत में हुआ था । उनके पिता का नाम संजय दुबे है जो नई दिल्ली में प्रसार भारती सचिवालय में अतिरिक्त महानिदेशक हैं । अपूर्वा ने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय, इटानगर, अरूणांचल प्रदेश से की थी इसके बाद आगे की पढ़ाई अंग्रेजी ऑनर्स में वेंकटेश्वर कॉलेज (DU) से की । उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई भी की है । इन सबके अलावा उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट से मानव संसाधन में पीजीडीएम पूरा किया है। जब वह अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी तब ही उनका खीचाव सिविल सर्विस परीक्षा की हुआ । उनकी बड़ी बहन अदिति भी सिविल सर्विस परीक्षा कर रही थी ।

निरंतर और गहन अध्ययन के बाद भी पहले प्रयास में सफलता न मिल सकी परन्तु पहले प्रयास के बाद एक तरह का अनुभव हो गया कि किस तरह के सवाल परीक्षा में पूछे जाते हैं । इसके पश्चात दूसरे प्रयास में इन्होंने यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास कर ली । अपूर्वा दुबे का ऑल इंडिया यूपीएससी (UPSC) रैंक 19 रहा । यह एक बहुत बड़ी सफलता रही । वर्तमान में वो आईएएस (IAS) के डीएम पद पर कार्यरत हैं । यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के समय पूरा परिवार का सपोर्ट रहा था । उनकी बहन ने भी निरंतर प्रयास के लिए मोटिवेट करते रही ।

सफलता की कहानी

इनके सिविल सेवा में जाने का सपना पहले से नहीं था बल्कि जब वे अपना कॉलेज कर रही थी तब उन्हे इस मार्ग में जाने की सूझी । उनके माता पिता नहीं चाहते थे कि बेटी इसमें जाएं क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा दिन – रात की मेहनत लगती है । बेटी ने जब इस मार्ग को चुना तो माता – पिता ने भी इन्हें सपोर्ट किया । वो निरंतर प्रयास में लगी हुवी थी और ऑप्शनल एवं सामान्य अध्ययन को भी समय निकालकर जरूर पढ़ती थी । उन्होंने कानून और लोक प्रशासन को ऑप्शनल विषय के रूप में चुना क्योंकि वो पहले से ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से इसकी पढ़ाई कर रही थी ।

वो प्रेरित रहने के लिए आईएएस (IAS) का इंटरव्यू पढ़ते रहती थी इससे उन्हें और अधिक पढ़ने का प्रेरणा मिलता था । उनके अनुसार जब वो इंटरव्यू पढ़ती है तब उन्हें मोटीवेशन मिलता है । इस तरह धीरे – धीरे एवं लगातार प्रयास के बाद उन्होंने पहली बार UPSC की परीक्षा दिलाई । जब वो पहला प्रयास की तो वो असफल रही । यह सबके लिए सबसे कठिन समय होता है क्योंकि कठोर प्रयास के बाद भी असफल होने पर लगभग ज्यादातर लोग टूट जाते हैं पर वो नहीं टूटी । फिर से अधिक प्रयास की और दूसरे प्रयास में वो सफल हो गई । सफलता छोटी – मोटी नहीं बहुत बड़ी थी । उनका ऑल इंडिया रैंक 19 तथा महिलाओं में रैंक 9 था । यह सफलता बहुत बड़ी थी । उनका चयन आईएएस (IAS) 2012 बैच के डीएम पद पर हुआ ।

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