IPS नवनीत सिकेरा जीवनी / जीवन परिचय [IPS navniet sekera Biography In Hindi]

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IPS नवनीत सिकेरा ने एक किसान परिवार में जन्म लिया था । अपनी पढ़ाई वे अन्य लोगों कि तरह की स्कूल की पढ़ाई, कॉलेज की पढ़ाई करते रहे अर्थात उन्हें प्रारंभ से ही आईएएस (IAS) बनने का सपना नहीं था । उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में IIT-JEE पास कर ली थी । वे सुरुवात से ही पढ़ाई में अच्छे रहे थे जिस कारण से उनका सिलेक्शन आईआईटी (IIT) में भी हो गया । कुछ समय पश्चात उन्हें सिविल सर्विस के प्रति रुचि जागृत हुई । इस तरह उनका ध्यान सिविल सर्विस की ओर आया और उन्होंने इस मार्ग में जाने का सोचा । उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही UPSC की परीक्षा पास कर ली थी । उनका पहला प्रिफरेंस आईपीएस (IPS) था इसलिए वे आईपीएस (IPS) बन गए । वर्तमान 2021 में उनका एडीजी (ADG) पद पर प्रोमोशन हो गया और वे इस पद पर कार्यरत हैं ।

नामनवनीत सिकेरा
उपनामज्ञात नहीं
जन्म तिथि22 अक्टूबर 1971
उम्र49 (8 जनवरी 2021 के अनुसार)
पितामनोहर सिंह
माताज्ञात नहीं
जन्म स्थलइटा उत्तरप्रदेश
स्कूलज्ञात नहीं
कॉलेजIIT रुड़की
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद
यूपीएससी रैंक (UPSC Rank)ज्ञात नहीं
आईएएस बैच (IAS Batch)1996
राष्ट्रीयताभारतीय

प्रारंभिक जीवन

नवनीत सिकेरा का जन्म 22 अक्टूबर 1971 को उत्तर प्रदेश के इटा में एक माध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम मनोहर सिंह सिकेरा है । अपनी 12 वीं तक कि पढ़ाई हिंदी मीडियम ब्वायज स्कूल में की । अच्छे अंक आने पर नवनीत ने गणित (Maths) विषय चुना । वे दिल्ली में हंसराज कॉलेज में प्रवेश के लिए गए थे लेकिन सिर्फ इसलिए कि सेकेरा के पास अंग्रेजी बोलने के कौशल की कमी थी, वे अपमानजनक रूप से कार्यालय से बाहर आ गए। नवनीत को कोई साधारण इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग नहीं करनी थी इसलिए उन्होंने आईआईटी (IIT) की तैयारी की । अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने IIT- JEE पास कर ली । उन्होंने IIT रुड़की कॉलेज से अपना IIT पूरा किया है, उन्होंने 1989 से 1993 तक IIT किया । इन सबके अलावा उन्होंने एमबीए (MBA) भी किया है । उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद से एमबीए (MBA) किया है ।

करियर / सफलता की कहानी

इसी बीच कुछ घटना घटी जिसके कारण से उनका मन पुलिस बनने की ओर आकर्षित हुई और उन्होंने आईपीएस (IPS) बनने की सोची । एक बार कुछ जमीनी विवाद को लेकर पुलिस थाना गए थे । दरअसल उनके जमीन का एक हिस्सा एक लोकल क्रिमिनल द्वारा हथिया लिया गया था । इसी को लेकर वो पुलिस स्टेशन गए थे मगर वहां कंप्लेन लिखने की बजाय उन्हें थाने से बेदखल कर दिया गया । इस अपमान को नवनीत सह नहीं सके और उन्होंने यूपीएससी (UPSC) क्लियर करके आईपीएस (IPS) बनने की ठानी ।

वे आईपीएस बनने के लिए तैयारी करने लगे और कठिन परिश्रम के बदौलत उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास कर ली । उनकी रैंक अच्छी थी वो चाहते तो आईएएस (IAS) भी बन सकते थे मगर उन्होंने केवल आईपीएस (IPS) बनने की ठानी । वे 1996 की आईपीएस (IPS) बैच में आईपीएस बने । आईपीएस (IPS) ज्वाइनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग गोरखपुर के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई थी।

निजी जीवन

ज्वाइनिंग के कुछ वर्षों पश्चात उन्होंने डॉ पूजा ठाकुर से विवाह कर ली जो एक सामाजिक कार्यकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर, परोपकारी, और उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक परामर्शदाता हैं । उनकी एक बेटा और एक बेटी भी है । उनके बेटे का नाम दिव्यांश सिकेरा तथा बेटी का नाम आर्या सिकेरा है ।

32 वर्ष की उम्र में राज्य की राजधानी लखनऊ में सबसे जवान पुलिस प्रमुख (SSP) बने । वे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं उन्हें 2001 में जब वे एसपी के टेक्निकल सर्विस में कार्य कर रहे थे तब उन्होंने GPS- GIS पर आधारित ऑटोमैटिक वाहन लोकेशन सिस्टम विकसित किया था इस कार्य के लिए उन्हें यूपी के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 5 लाख रुपए के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।

उन्होंने महिला और नारी सशक्तिकरण पर भी कार्य किया है । उनके द्वार ही “महिला पॉवर लाइन 1090” विकसित किया गया था जिसे 2012 में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया था । वे इन सभी के अलावा एक मुख्य वक्ता, कॉरपोरेट मेंटर, ग्रोथ हैकर, पब्लिक सर्वेंट, वुमन एम्पावरमेंट प्रैक्टिशनर और पॉलिसी डिज़ाइनिंग विशेषज्ञ भी हैं । इन सबके अलावा वे भारतीय फिल्म लेखक एसोसिएशन के एक सक्रिय सदस्य भी हैं ।

उनके ही जीवन की कहानी से प्रेरित होकर एक वेब सीरीज “भौकाल” बनाया गया है । इसमें यह दिखाया गया है कि जब 2004 में एसएसपी (SSP) के पद पर तैनात होते हैं तब वो मुजफ्फरनगर के माफियाओं का किस तरह सफाया करते हैं । फिल्म में जिस तरह उन्हें दबंग दिखाया गया है उस तरह वो अपने रीयल लाइफ में भी दबंग आदमी भी हैं । उन्होंने एनकाउंटर में 60 क्रिमिनल का एनकाउंटर कर चुके हैं ।

अवॉर्ड्स –

• नवाचार के लिए मुख्यमंत्री का पुरस्कार (2002)
• विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक (24/01/05)
• राष्ट्रपति का पुलिस पदक (26/01/13)
• महानिदेशक की प्रशस्ति डिस्क – रजत (15/08/15)
• महानिदेशक के संचार डिस्क – स्वर्ण (26/01/18)

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